या देवी सर्वभूतेषु शक्ति-रूपेण संस्थिता | Ya Devi Sarvabhuteshu Lyrics

Ya Devi Sarvabhuteshu Lyrics
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या देवी सर्वभूतेषु शक्ति-रूपेण संस्थिता – एक दिव्य स्तुति का अर्थ, महत्व और आध्यात्मिक संदेश

हिंदू धर्म में देवी की उपासना का एक अत्यंत गहरा और भावनात्मक स्थान है। देवी केवल एक मूर्ति या शक्ति का प्रतीक नहीं हैं, बल्कि वे स्वयं सृष्टि की मूल ऊर्जा हैं — वह चेतना, जो हर जीव में, हर परमाणु में, हर विचार में प्रवाहित होती है। इसी भाव को व्यक्त करता है यह प्रसिद्ध श्लोक —

“या देवी सर्वभूतेषु शक्ति-रूपेण संस्थिता,
नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः।”

इस श्लोक का अर्थ है —
“जो देवी सभी प्राणियों में शक्ति के रूप में स्थित हैं, उन देवी को बार-बार नमस्कार है।”

यह श्लोक देवी महात्म्य (दुर्गा सप्तशती) का हिस्सा है, जो मार्कण्डेय पुराण के भीतर वर्णित है। यह ग्रंथ देवी दुर्गा के विभिन्न स्वरूपों और उनकी दिव्य शक्तियों की महिमा का वर्णन करता है। आइए इस श्लोक के अर्थ, महत्व और जीवन से जुड़ाव को विस्तार से समझते हैं।


🌺 देवी शक्ति का सार्वभौमिक रूप

देवी का अर्थ केवल “नारी रूप” नहीं, बल्कि वह सर्वव्यापी शक्ति है जो हर चीज़ में विद्यमान है। जब हम कहते हैं “या देवी सर्वभूतेषु”, इसका तात्पर्य यह है कि देवी केवल मंदिरों में नहीं रहतीं, बल्कि प्रत्येक मनुष्य, पशु, पक्षी, वृक्ष, जल, अग्नि और वायु में भी उनका अस्तित्व है।

“शक्ति-रूपेण संस्थिता” का अर्थ है – देवी शक्ति के रूप में विद्यमान हैं। यह वही ऊर्जा है जो पृथ्वी को स्थिर रखती है, सूर्य को चमकाती है, हवा को प्रवाहित करती है और जीवन को चलाती है। यही शक्ति कभी मां दुर्गा बनकर दानवों का नाश करती है, तो कभी मां लक्ष्मी बनकर समृद्धि देती है, और कभी मां सरस्वती बनकर ज्ञान का प्रकाश फैलाती है।

Here are the complete “Ya Devi Sarvabhuteshu” lyrics in Sanskrit (with English transliteration and meaning):


🌺 या देवी सर्वभूतेषु (Ya Devi Sarvabhuteshu) Lyrics

Sanskrit:

या देवी सर्वभूतेषु
विष्णुमायेति शब्दिता।
नमस्तस्यै नमस्तस्यै
नमस्तस्यै नमो नमः॥

या देवी सर्वभूतेषु
चेतनेत्यभिधीयते।
नमस्तस्यै नमस्तस्यै
नमस्तस्यै नमो नमः॥

या देवी सर्वभूतेषु
बुद्धिरूपेण संस्थिता।
नमस्तस्यै नमस्तस्यै
नमस्तस्यै नमो नमः॥

या देवी सर्वभूतेषु
शक्तिरूपेण संस्थिता।
नमस्तस्यै नमस्तस्यै
नमस्तस्यै नमो नमः॥

या देवी सर्वभूतेषु
शान्तिरूपेण संस्थिता।
नमस्तस्यै नमस्तस्यै
नमस्तस्यै नमो नमः॥

या देवी सर्वभूतेषु
मातृरूपेण संस्थिता।
नमस्तस्यै नमस्तस्यै
नमस्तस्यै नमो नमः॥

या देवी सर्वभूतेषु
दुर्गेति रूपेण संस्थिता।
नमस्तस्यै नमस्तस्यै
नमस्तस्यै नमो नमः॥


English Transliteration:

Yā Devī Sarva Bhūteṣhu
Viṣhṇu Māyeti Shabditā
Namastasyai Namastasyai
Namastasyai Namo Namaḥ॥

Yā Devī Sarva Bhūteṣhu
Chetanetya Bhidhīyate
Namastasyai Namastasyai
Namastasyai Namo Namaḥ॥

Yā Devī Sarva Bhūteṣhu
Buddhirūpeṇa Saṁsthitā
Namastasyai Namastasyai
Namastasyai Namo Namaḥ॥

Yā Devī Sarva Bhūteṣhu
Shaktirūpeṇa Saṁsthitā
Namastasyai Namastasyai
Namastasyai Namo Namaḥ॥

Yā Devī Sarva Bhūteṣhu
Shāntirūpeṇa Saṁsthitā
Namastasyai Namastasyai
Namastasyai Namo Namaḥ॥

Yā Devī Sarva Bhūteṣhu
Mātr̥rūpeṇa Saṁsthitā
Namastasyai Namastasyai
Namastasyai Namo Namaḥ॥

Yā Devī Sarva Bhūteṣhu
Durgā Rūpeṇa Saṁsthitā
Namastasyai Namastasyai
Namastasyai Namo Namaḥ॥


Meaning (English Translation):

The Goddess who resides in all beings
As the power of Vishnu’s divine illusion (Maya)
As consciousness, intelligence, power, peace, motherhood, and Durga herself
To that Devi, we bow again and again.


🌼 श्लोक का दार्शनिक अर्थ

इस श्लोक में देवी को तीन बार प्रणाम किया गया है —
“नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः।”
तीन बार दोहराना यह दर्शाता है कि देवी के प्रति श्रद्धा केवल शब्दों में नहीं, बल्कि मन, वचन और कर्म — तीनों से होनी चाहिए।

यह श्लोक हमें यह भी सिखाता है कि शक्ति का स्रोत बाहर नहीं, हमारे भीतर ही है। जब हम स्वयं में स्थित उस देवी शक्ति को पहचानते हैं, तभी हम अपने जीवन में संतुलन, साहस और आत्मविश्वास पा सकते हैं।


🔱 देवी महात्म्य में इस श्लोक का स्थान

“या देवी सर्वभूतेषु…” जैसे कई श्लोक देवी महात्म्य के 11वें अध्याय में मिलते हैं। यहाँ देवी की स्तुति में अनेक रूपों का उल्लेख है —

  • शक्ति रूपेण संस्थिता
  • भूति रूपेण संस्थिता
  • बुद्धि रूपेण संस्थिता
  • नीद्रा रूपेण संस्थिता
  • माया रूपेण संस्थिता
  • दया रूपेण संस्थिता

इस प्रकार देवी हर रूप में हैं — कभी ज्ञान देती हैं, कभी दया, कभी नींद के रूप में विश्राम, और कभी शक्ति के रूप में प्रेरणा। इस श्लोक के माध्यम से साधक देवी के इन सभी स्वरूपों को नमस्कार करता है।


🪔 जीवन में देवी शक्ति का महत्व

हमारे जीवन में कई बार ऐसा होता है जब हम खुद को कमजोर, असहाय या दिशाहीन महसूस करते हैं। ऐसे में “या देवी सर्वभूतेषु शक्ति-रूपेण संस्थिता” का स्मरण हमें यह याद दिलाता है कि हमारे भीतर ही वह अपार शक्ति मौजूद है, जो हर कठिनाई से उबर सकती है।

  • जब कोई व्यक्ति न्याय के लिए खड़ा होता है — वह भी देवी शक्ति का ही रूप है।
  • जब कोई मां अपने बच्चे की रक्षा करती है — वह भी देवी की ही शक्ति है।
  • जब कोई विद्यार्थी ज्ञान प्राप्त करता है — तब मां सरस्वती की शक्ति प्रकट होती है।
  • जब कोई व्यक्ति जरूरतमंद की सहायता करता है — तब मां अन्नपूर्णा की करुणा झलकती है।

अर्थात, हर शुभ कर्म में देवी शक्ति कार्यरत रहती है।


🌸 नवरात्रि और इस श्लोक का विशेष महत्व

नवरात्रि के नौ दिन देवी के नौ रूपों की उपासना के लिए समर्पित होते हैं। इन दिनों या देवी सर्वभूतेषु… का जाप विशेष रूप से किया जाता है। इस स्तुति के माध्यम से हम देवी के प्रति अपनी कृतज्ञता प्रकट करते हैं कि उन्होंने सृष्टि में ऊर्जा और संतुलन बनाए रखा है।

यह श्लोक न केवल पूजा का एक अंग है, बल्कि एक आध्यात्मिक अनुभव भी है —
यह हमें सिखाता है कि नारी मात्र देह नहीं, बल्कि सृजन, पालन और संहार की शक्ति है। इसलिए देवी की पूजा, वास्तव में जीवन की ऊर्जा की पूजा है।


🌷 स्त्री में देवी शक्ति का प्रतिबिंब

यह श्लोक समाज को यह संदेश देता है कि प्रत्येक स्त्री में देवी का अंश विद्यमान है। चाहे वह मां हो, बहन, पत्नी या बेटी — हर रूप में वह सृजन की प्रतीक है।
आज के समय में जब समाज में नारी-सशक्तिकरण की बातें की जाती हैं, यह श्लोक उसकी जड़ को स्पर्श करता है —
क्योंकि देवी की उपासना का अर्थ है स्त्री के प्रति सम्मान और समानता का भाव रखना।

जब हम यह कहते हैं “या देवी सर्वभूतेषु शक्ति-रूपेण संस्थिता”, तो हम यह स्वीकार करते हैं कि हर स्त्री में वही दिव्य शक्ति बसती है, जिसे हम दुर्गा, लक्ष्मी या सरस्वती के रूप में पूजते हैं।


🕉️ आध्यात्मिक दृष्टि से संदेश

यह श्लोक केवल धार्मिक नहीं, बल्कि अत्यंत आध्यात्मिक भी है। इसका गहरा संदेश है —
संपूर्ण ब्रह्मांड एक ऊर्जा से संचालित है, और वह ऊर्जा ही देवी है।
जब हम इस सत्य को पहचान लेते हैं, तब हम भेदभाव से ऊपर उठकर सभी में ईश्वर को देखने लगते हैं।

आध्यात्मिक रूप से इसका अर्थ है —

  • अपने भीतर की शक्ति को पहचानो।
  • दूसरों में भी उसी शक्ति का सम्मान करो।
  • और हर स्थिति में कृतज्ञ रहो।

🌻 देवी केवल मंदिरों में नहीं, हमारे भीतर भी हैं

“या देवी सर्वभूतेषु शक्ति-रूपेण संस्थिता” केवल एक श्लोक नहीं, बल्कि जीवन दर्शन है।
यह हमें यह सिखाता है कि देवी हर जगह हैं — हमारे कार्यों में, हमारे विचारों में, और हमारे भावों में।
जब हम इस बात को समझ लेते हैं, तो हमारे जीवन में आत्मविश्वास, धैर्य और सकारात्मकता स्वाभाविक रूप से बढ़ जाती है।

देवी की उपासना केवल दीप जलाने या मंत्र पढ़ने तक सीमित नहीं है, बल्कि यह उस शक्ति को पहचानने की यात्रा है जो हमें सृजन, संरक्षण और परिवर्तन के मार्ग पर आगे बढ़ाती है।

अंत में, वही भाव दोहराते हैं —

या देवी सर्वभूतेषु शक्ति-रूपेण संस्थिता।
नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः॥

हे मां, आप हर जीव में शक्ति के रूप में विद्यमान हैं — आपको बारंबार प्रणाम।
आप हमें सदैव अपने दिव्य आशीर्वाद से शक्तिमान, विवेकशील और करुणामयी बनाए रखें। 🌺

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